9 दिसंबर 2018 - 15:05
निकी हेली ने भी माना, ख़ाशुक़जी की हत्या में सऊदी सरकार का हाथ

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि ने, जो अपने पद से त्यागपत्र दे चुकी हैं, अंततः स्वीकार किया है सऊदी अरब के सरकार विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के लिए सऊदी अरब की सरकार ज़िम्मेदार है।

ख़ाशुक़जी, सऊदी अरब की सरकार विशेष कर इस देश के युवराज मुहम्मद बिन सलमान की नीतियों के घोर आलोचक थे और इसी लिए सऊदी सरकार उन्हें रास्ते से हटाने की कोशिश में थी। दो अक्तूबर को इस्तंबोल स्थित सऊदी कोन्सलेट में जाने के बाद ख़ाशुक़जी लापता हो गए थे और 18 दिन के मौन और हत्या के इन्कार के बाद अंततः सऊदी अरब की सरकार ने विश्व समुदाय के दबाव के चलते यह बात मान ली थी कि ख़ाशुक़जी की हत्या कोनस्लेट के अंदर हुई है लेकिन उसने इस बात पर बल दिया था कि इस हत्या में सरकार का कोई हाथ नहीं है बल्कि कुछ तत्वों ने अपनी मर्ज़ी से यह हत्या की है।

 

ख़ाशुक़जी की हत्या, सऊदी अरब में विरोधियों के दमन और यमन युद्ध के चलते पूरे संसार में विभिन्न संगठन और सरकारें सऊदी अरब विशेष कर युवराज मुहम्मद बिन सलमान के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाए जाने और रियाज़ को हथियार न बेचे जाने की मांग कर रही हैं। इन सबके बावजूद अमरीका और सबसे ऊपर इस देश के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प न केवल यह कि इस हत्याकांड में बिन सलमान की भूमिका को मानने के लिए तैयार नहीं हैं बल्कि वे इस संबंध में उन पर किसी भी तरह का दबाव डाले जाने का भी विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प ने तो खुल कर यहां तक कह दिया है कि अगर ख़ाशुक़जी की हत्या के बारे में सऊदी अरब के युवराज को ज्ञान होने के बाद सिद्ध भी हो जाए तब भी सऊदी अरब, अमरीका का घटक बना रहेगा।

 

वास्तव में एक ओर अमरीका व सऊदी अरब के गहरे राजनैतिक व आर्थिक संबंध, हथियारों के बड़े बड़े समझौते और मुहम्मद बिन सलमान की ओर से अमरीकी आदेशों के आज्ञापालन और दूसरी ओर वाॅशिंग्टन में अमरीकी राजनितिज्ञों के बीच सऊदी लाॅबी की गतिविधियों के कारण अमरीकी सरकार, ख़ाशुक़जी हत्याकांड में बिन सलमान की भूमिका अनेक ठोस साक्ष्यों के बावजूद उनका समर्थन कर रही है और उन्हें क्लिन चिट देने की कोशिश में है। संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की स्थायी प्रतिनिधि निकी हेली द्वारा, जो अपने पद से त्यागपत्र दे चुकी हैं, ख़ाशुक़जी की हत्या में बिन सलमान के लिप्त होने की स्वीकारोक्ति से पता चलता है कि इस मामले में अमरीकी अधिकारियों में भी गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं लेकिन ट्रम्प, अपने हितों के चलते सऊदी अरब का समर्थन जारी रखने पर अड़े हुए हैं।